दसवां बाब पेज नम्बर 175से179तक,फ़ज़ाइले आमाल हिन्दी, हदीस नम्बर 6, हज़रत उम्मे ज़ियाद रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की चन्द औरतों के साथ ख़ैबर की जंग में शिरकत ,
हुज़ूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के ज़माने में मर्दों को तो जिहाद की, शिरकत का जॉक था, ही, जिसके वाक़िआत कसरत से नक़्ल किये जाते हैं। और औरते भी इस चीज़ में मर्दों से पीछे नहीं थीं। हमेशा मुशताक रहती थीं, और जहां मौक़ा मिल जाता, पहुंच जातीं।
उम्मे ज़ियाद रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, कहती हैं कि ख़ैबर की लड़ाई में, हम छः औरतें जिहाद में शिरकत के लिए चल दीं, हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, को इत्तिला मिली तो हमको बुलाया। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के चेहरा-ए-अनवर पर गुस्से के आसार थे। इर्शाद फ़र्माया कि तुम किस की इजाजत से आई, और किस के साथ आईं।
हमने अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह, हमको ऊन बुनना आता है, और जिहाद में उसकी ज़रूरत पड़ती है। जख्मो की दवाएं भी हमारे पास है, और कुछ नहीं तो मुजाहिद्दीन को तीर ही पकड़ाने में मदद दे देंगे, और जो बीमार होगा, उसकी दवा की मदद कर सकेंगे। सत्तू वग़ैरह घोलने, और पिलाने में काम दे देंगे। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने ठहर जाने की इजाज़त दे दी।
फायदा,- हक़ तआला शानुहू ने उस वक़्त औरतों में भी, कुछ ऐसा वलवला और जुुर्रअत पैदा फ़र्माई थी, जो आजकल मर्दों में भी नहीं है। देखिए, यह सब अपने शौक से खुद ही पहुंच गयीं, और कितने काम अपने करने के तजवीज कर लिए। हुनैन की लड़ाई में उम्मे सुलेम बावुजूद कि हामिला थीं, अब्दुल्लाह बिन अभी तल्हा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, पेट में थे, शरीक हुईं और एक खंजर साथ लिए रहती थीं। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने फ़र्माया, यह किस लिए है?
अर्ज़ किया कि, अगर कोई दुश्मन मेरे पास आयेगा, तो उसके पेट में घोंप दूंगी। इससे पहले उहद वगेरह की लड़ाई में भी यह शरीक हुई थीं। ज़ख्मियों की दवा-और बीमारों की ख़िदमत करती थीं। हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, कहते हैं कि मैंने हज़रत आइशा रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, और उम्मे सुलेम को देखा, कि निहायत मुस्तैदी से मश्क भर कर लाती थीं, और ज़ख्मियों को पानी पिलाती थीं। और जब खाली हो जाती तो फिर भर लातीं।
हदीस नम्बर 7, हज़रत उम्मे हराम रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की ग़ज़वतुल बहर में शिरकत की तमन्ना,
हज़रत उम्मे हराम रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की खाला थीं। हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, कसरत से उनके घर तशरीफ़ ले जाते, और कभी दोपहर वग़ैरह को वहीं आराम भी फ़र्माते थे। एक मर्तबा हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, उनके घर आराम फ़र्मा रहे थे, कि मुस्कुराते हुए उठे। उम्मे हराम रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह, मेरे मां-बाप आप पर कुर्बान हों, किस बात पर आप मुस्कुरा रहे थे?
आपने फ़र्माया, मेरी उम्म्त के कुछ लोग मुझे दिखलाये गये, जो समुन्दर पर लड़ाई के इरादे से, इस तरह सवार हुए जैसे तख्तों पर बादशाह बैठे हों।
उम्मे हराम रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह, दुआ फ़र्मा दीजिए कि हक़ तआला शानुहू मुझे भी उन में शामिल फ़र्मा दे। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने फ़र्माया, तुम भी इन में शामिल होगी। इसके बाद हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने आराम फ़र्माया, फिर मुस्कुराते हुए उठे। उम्मे हराम रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, ने फिर मुस्कुराने का सबब पूछा। आपने ने फिर उसी तरह इर्शाद फ़र्माया। उम्मे हराम रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, ने फिर वही दरख्वास्त की कि, या रसूलल्लाह, आप दुआ फ़र्मा दे कि मैं भी उन में हूं। आपने ने इर्शाद फ़र्माया, तुम पहली जमाअत में होगी।
चुनांचे हज़रत उस्मान रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, के ज़माना-ए-खिलाफत में, अमीर मआविया रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने, जो शाम के हाकिम थे, जजाइर कब्रस पर हमले की इजाजत चाही। हज़रत उस्मान रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने इजाजत दे दी।
[3D]अमीर मआविया रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने एक लश्कर के साथ हमला फ़र्माया, जिसमे उम्मे हराम रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, अपने खाविन्द हज़रत उबादा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, के साथ लश्कर में शरीक हुईं, और वापसी पर एक खच्चर पर सवार हो रही थीं, कि वह बिदका, और वह उस पर से गिर गयी, जिस से गर्दन टूट गयी, और इंतिकाल फ़र्मा गईं और वहीं दफ़्न कर दी गयीं।
फायदा,- यह वलवला था, जिहाद में शिरकत का कि हर लड़ाई में शिरकत की दुआ कराती थीं, मगर चूंकि इन दोनों लड़ाइयों में से पहली लड़ाई में इंतिकाल फ़र्माना मुतअय्यन था, इसलिए दूसरी लड़ाई में शिरकत न हो सकी, और इसी वजह से हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने इसमें शिरकत की दुआ भी न फ़र्मायी।
हदीस नम्बर 8, हज़रत उम्मे सुलैम् रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, की लड़के के मरने पर खाविन्द से हमबिस्तरी,
उम्मे सुलैम् रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की वालिदा थीं, जो अपने पहले खाविन्द यानी हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, के यालिद की वफ़ात के बाद बेवा हो गईं, और हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की परवरिश के ख्याल से कुछ दिनों तक निकाह नहीं किया था। इसके बाद हज़रत अब्दुल्लाह रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, से निकाह किया, जिससे एक साहब ज़ादे अबू उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, पैदा हुए, जिन से हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, जब उनके घर तशरीफ ले जाते, हंसी भी फ़र्माया करते थे।
इत्तिफ़ाक से अबू उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का इंतिकाल हो गया। उम्मे सुलेम् रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, ने उनको नहलाया-धुलाया कफ़न पहनाया, और चारपाई पर लिटा दिया। अबु तल्हा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का रोज़ा था। उम्मे सुलेम् रजि अल्लाहु ताआला अन्ह, ने उनके लिए खाना वगैरह तैयार किया, और खुद अपने आपको भी आरास्ता किया। खुश्बू वग़ैरह लगायी, रात को खाविन्द आये, खाना वगैरह भी खाया, बच्चे का हाल पूछा तो उन्होंने कह दिया कि, अब तो सुकून है मालूम होता है, बिल्कुल अच्छा हो गया। वह बे-फ़िक्र हो गये।
रात को खाविन्द ने सोहबत भी की। सुबह को जब वह उठे तो कहने लगीं, कि एक बात दरयाफ्त करनी थी। अगर कोई शख्स किसी को मांगी चीज़ दे दे, फिर वह उससे वापस लेने लगे तो वापस कर देना चाहिए, या उसे रोक ले, वापस न करे। वह कहने लगे कि ज़रूर वापस कर देना चाहिए। रोकने का क्या हक़ है। मांगी चीज़ का वापस करना ज़रूरी है।
यह सुन कर उम्मे सुलेम् रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, ने कहा कि तुम्हारा लड़का जो अल्लाह की अमानत था, वह अल्लाह ने ले लिया। अबू तल्हा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, को इस पर रंज हुआ, और कहने लगे कि तुमने मुझ को सुबर भी न की। सुबह को हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, की ख़िदमत में अबू तल्हा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने सारे किस्से को अर्ज़ किया। हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने दुआ दी और फ़र्माया कि शायद अल्लाह जल्ला शानुहू इस रात में बरकत अता फ़र्मावे।
एक अंसारी रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, कहते हैं कि मैंने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, की दुआ की बरकत देखी, कि उस रात के हमल से अब्दुल्लाह बिन अबी तल्हा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, पैदा हुए, जिनके नो बच्चे हुए। सबने क़ुरआन शरीफ़ पढ़ा।
फायदा,- बड़े सब्र और हिम्मत की बात है, कि अपना बच्चा मर जाए, और इसी तरह उसको बर्दाश्त करे कि खाविन्द को भी महसूस न होने दे, चूंकि खाविन्द का रोज़ा, था इसलिए खयाल हुआ की, खबर होने पर खाना भी मुश्किल होगा
दुआ का तलब गार, आपका खादिम, मुहम्मद इलयास,मेरे और, मेरे परिवार,के हक़ में दुआ करें