Fazail e Amaal (Namaz) 1

               नमाज की फजीलत के बयान मे

                      (हदीस नम्बर 1)

         पेज 6 से 8 तक फ़ज़ाइले नमाज़ हिन्दी 

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु,  नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम,  का इर्शाद नक़ल करते हैं  कि इस्लाम की बुनियाद पांच स्तूनों पर है। 

सबसे अव्वल 'ला इला हा इल्लल लाहु  मुहम्मद दुर्रसूलुल्लाह',  की गवाही देना यानी, 

इस बात का इक़रार करना,  कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं,  और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम,  उसके बन्दे और रसूल हैं। 

उसके बाद नमाज का कायम करना । जकात अदा करना,। हज करना । रमज़ानुल मुबारक के रोज़े रखना'।

फायदा । यह पांचों चीज़ें ईमान के बड़े उसूल और अहम अर्कान हैं। 

नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, ने इस पाक हदीस में बतौर मिसाल के इस्लाम को एक खेमे के साथ तश्बीह³ दी है। जो पांच स्तूनों पर कायम होता है। 

पस कलमा-ए-शहादत,¹ ख़ेमे की दरमियानी लकड़ी की तरह है।  और बाक़ी चारों अरकान ब मंज़िला² उन चार स्तूनों के हैं। जो चारों कोनों पर हों। 

अगर दरमियानी लकड़ी न हो तो खेमा खड़ा हो ही नहीं सकता। और अगर यह लकड़ी मौजूद हो और चारों तरफ़ के कोनों में कोई सी लकड़ी न हो।  तो खेमा क़ायम तो हो जाएगा, लेकिन जिस कोने की लकड़ी नहीं होगी, वह जानिब नाकिस³ और गिरी हुई होगी। 

इस पाक इर्शाद के बाद, अब हम लोगों को अपनी हालत पर खुद ही ग़ौर कर लेना चाहिए।

कि इस्लाम के इस ख़ेमे को हमने किस दर्जे तक क़ायम कर रखा है। और इस्लाम का कौन सा रुकन ऐसा है।  जिसको हमने पूरे तौर पर संभाल रखा है।

इस्लाम के यह पांचों अरकान निहायत अहम हैं।  हत्ताकि इस्लाम की बुनियाद इन्हीं को क़रार दिया गया है।  और एक मुसलमान के लिए ब हैसियत मुसलमान होने के, इन सब का एहतमाम निहायत ज़रूरी है।  

मगर ईमान के बाद सबसे अहम चीज़ नमाज है।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु, कहते हैं, कि मैंने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम,  से दर्याफ़्त किया कि, अल्लाह तआला शानुहू के यहां, सबसे ज़्यादा महबूब अमल कौन सा है। ?  इर्शाद फ़रमाया कि नमाज़ । मैं ने अर्ज़ किया, कि इसके बाद क्या है। ? इर्शाद फ़रमाया, कि वालिदैन के साथ हुस्ने सुलूक । उनके साथ अच्छा, बर्ताव करना ,

मुल्ला अलीक़ारी रहमतुल्ला अलइही, फ़रमाते हैं, कि इस हदीस में उलमा के इस क़ौल की दलील है, कि ईमान के बाद सबसे मुकददम नमाज़ है। 

इसकी ताईद उस सहीह हदीस से भी होती है, जिसमें इर्शाद है, 'अस्सलातु ख़ैरु मौज़ूइिन'⁵ यानी बेहतरीन अमल। जो अल्लाह तआला, ने बंदों के लिए मुक़र्रर फ़रमाया है, वह नमाज़ है।

एक और अहादीस में कसरत से, यह मज़्मून साफ़ और सहीह हदीसों में, नक़ल किया गया, कि तुम्हारे आमाल में सब से बेहतर अमल, नमाज़ है। 

चुनांचे, जामेअ सग़ीर में, हज़रत सौबान, इब्ने उमर, सल्मा, अबू उमामा, उबादा रज़ियल्लाहु अन्हुम, पांच सहाबा से यह हदीस नक़ल की गई है। 

और हज़रत इब्ने मसऊद व अनस रज़ियल्लाहु अन्हु, से अपने वक़्त पर नमाज़ का पढ़ना, अफ़ज़ल तरीन अमल नक़ल किया गया है।

हज़रत इब्ने उमर, और उम्मे फरवा, से अववल वक़्त, नमाज़ का पढ़ना, नक़ल  किया गया है। मक़सद सब का क़रीब ही क़रीब है।

इस जिल्द की, बाकी हदीसे जल्द ही, वेबसाइट पर अपलोड, कर दी जायेंगी,  इन्शा अल्लाह 

दुवा का तलब गार, आपका खादिम, मुहम्मद इलयास, 

मेरे और, मेरे परिवार,  के हक़ में दुआ करें

 


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