Fazail e Amaal (Hikayate Sahaba) B9/7_9

नवां बाब पेज नम्बर 163से166तक,फ़ज़ाइले आमाल हिन्दी, हदीस नम्बर 7, हज़रत इब्ने उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, से सवाल कि नमाज़ क़स्र क़ुरआन में नहीं?

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, से एक शख़्स ने पूछा, कि क़ुरआन शरीफ़ में मुक़ीम की नमाज़ का भी ज़िक्र है, और ख़ौफ़ की नमाज़ का भी, मुसाफ़िर की नमाज़ का ज़िक्र नहीं। उन्होंने फ़रमाया कि बिरादर ज़ादे, अल्लाह जल्ला शानुहू ने हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, को नबी बना कर भेजा। हम लोग अन्जान थे, कुछ नहीं जानते थे। बस जो हमने उनको करते देखा है, वह करेंगे 

फायदा,- मक़्सूद यह है कि हर मस्अले का सराहतन साफ़ साफ़ क़ुरआन शरीफ़ में होना ज़रूरी नहीं। अमल के वास्ते हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, से साबित हो जाना काफ़ी है।

खुद हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, का इर्शाद है कि, मुझे क़ुरआन शरीफ़ अता हुआ, और उसके बराबर और अहकाम दिये गये। अंक्ररीब वह ज़माना आने वाला है, कि पेट भरे लोग अपने गद्दों पर बैठ कर कहेंगे, कि बस क़ुरआन शरीफ़ को मज़बूत पकड़ लो, जो उसमें अहकाम हैं उन पर अमल करो।

फायदा,- पेट भरे से मुराद यह है, कि इस किस्म के फ़ासिद बिगाड़ पैदा करने वाले, दौलत के नशे से ही पैदा होते हैं।

हदीस नम्बर 8, हज़रत इब्ने मुग़फ़्फ़ल रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का ख़ज़्फ़ की वजह से कलाम छोड़ देना

अब्दुल्लाह बिन मुग़फ़्फ़ल रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का एक नव-उम्र भतीजा ख़ज़्फ़ कंकरिया से खेल रहा था। उन्होंने देखा और फ़रमाया कि बिरादर ज़ादा ऐसा न करो। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने इर्शाद फ़रमाया कि इससे फ़ायदा कुछ नहीं, न शिकार हो सकता है, न दुश्मन को नुक़्सान पहुंचाया जा सकता है, और इत्तिफ़ाक़न किसी के लग जाये, तो आंख फूट जाये, दांत टूट जाये। भतीजा कम-उम्र था। उसने जब चचा को ग़ाफ़िल देखा तो फिर खेलने लगा। उन्होंने देख लिया, फ़रमाया, मैं तुझे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, का इर्शाद सुनाता हूं, तू फिर उसी काम को करता है। खुदा की कसम, तुझ से कभी बात नहीं करूंगा। एक दूसरे किस्से में इसके बाद है, खुदा की क़सम, न तेरे जनाज़े में शरीक हूंगा, न तेरी अयादत करूंगा।

फायदा,- ख़ज़्फ़ इस को कहते हैं कि अंगूठे पर छोटी-सी कंकर रख कर उसको उंगली से फेंक दिया जाए। बच्चों में आमतौर से इस तरह खेलने का मर्ज़ होता है, यह ऐसा तो होता नहीं कि उससे शिकार हो सके, हां, आंख में किसी के इत्तिफ़ाक़न लग जाए, तो उसको ज़ख्मी ही कर दे।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मुग़फ़्फ़ल रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, को इसका तहम्मुल न हो सका कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, का इर्शाद सुनाने के बाद भी वह बच्चा इस काम को करे। हम लोग सुबह से शाम तक हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के कितने इर्शादात सुनते हैं, और उनका कितना एहतिमाम करते हैं, हर शख़्स खुद ही अपने मुताल्लिक़ फैसला कर सकता है।

हदीस नम्बर 9, हज़रत हकीम बिन हिज़ाम रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का सवाल से अहद

हकीम बिन हिज़ाम रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, एक सहाबी हैं। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, की ख़िदमत में हाज़िर हुए कुछ तलब किया। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने अता फ़रमाया, फिर किसी मौक़े पर कुछ मांगा। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने फिर मरहमत फ़रमा दिया। तीसरी दफा फिर सवाल किया। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने अता फ़रमाया, और यह इर्शाद फ़रमाया कि हकीम यह माल सब्ज़ बाग़ है, ज़ाहिर में बड़ी मीठी चीज़ है, मगर इसका दस्तूर यह है, कि अगर यह दिल के इस्तिग़ना से मिले तो इस में बरकत होती है,और अगर तमाअ और लालच से हासिल हो तो इस में बरकत नहीं होती, ऐसा हो जाता है (जैसे जूउल बक़र की बीमारी हो) कि हर वक़्त खाये जाए, और पेट न भरे।

हकीम रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह, आप के बाद अब किसी को नहीं सताऊंगा। इसके बाद हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने अपने ज़माना-ए-खिलाफ़त में, हकीम रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, को बैतुलमाल से कुछ अता फ़रमाने का इरादा किया। उन्होंने इन्कार कर दिया। इसके बाद हज़रत उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने अपने ज़माना-ए-खिलाफ़त में, बार-बार इस्रार किया, मगर उन्होंने इन्कार ही फ़रमा दिया।

फायदा,- यही वजह है कि आज कल हम लोगों के मालों में बरकत नहीं होती, कि लालच और तमाअ में घिरे रहते हैं।

दुवा का तलब गार,आपका खादिम,मुहम्मद इलयास, मेरे और,मेरे परिवार, के हक़ में दुआ करें 

Previous Next

हलाल कमाई इन्सान खाता है

और हराम कमाई इन्सान को खा जाती है

Have A Nice Day Sir/Mam

Good Health Good Future For You and Me

نموذج الاتصال