चौथा बाब,पेज नम्बर 79से82तक, फ़ज़ाइले आमाल हिन्दी,
हदीस नम्बर5, हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का एहतियातन बाग़ वक़्फ़ करना
इब्ने सीरीन रहमतुल्लाह अलईही कहते हैं, कि हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की जब वफ़ात का वक़्त क़रीब आया, तो आपने हज़रत आइशा रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, से फ़रमाया कि मेरा दिल नहीं चाहता था, कि बैतुल माल से कुछ लूँ, मगर उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, न माने कि दिक़्क़त होगी और तुम्हारी तिजारत की मशग़ूली से मुसलमानों का हरज होगा। इस मजबूरी से मुझे लेना पड़ा। इसलिए अब मेरा फ़लां बाग़ इसके एवज़ में दे दिया जाए। जब हज़रत अबूबक्र रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का विसाल हो गया तो हज़रत आइशा रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, ने हज़रत उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, के पास आदमी भेजा और वालिद की वसीयत के मुवाफ़िक़ वह बाग़ दे दिया। हज़रत उमर रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने फ़रमाया, अल्लाह तआला शानुहू तुम्हारे बाप पर रहम फ़रमायें, उन्होंने यह चाहा कि किसी को लब कुशाई (ज़बान खोलना) का मौक़ा ही न दें,
फायदा , ग़ौर करने की बात है, कि अव्वल तो वह मिक़दार ही क्या थी, जो हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने ली। इसके बाद लेना भी अहलुर्राए के इसरार से था, और मुसलमानों के नफ़ा की वजह से उसमें भी जितनी मुम्किन से मुम्किन एहतियात हो सकती थी, इसका अन्दाज़ा क़िस्सा 4 बाब 3 से मालूम हो गया कि बीवी ने तंगी उठाकर, पेट काट कर कुछ दाम मीठे के लिए जमा किये तो उनको बैतुलमाल में जमा फ़रमा दिया, और इतनी मिक़दार मुस्तक़िल कम कर दी। इस सबके बाद यह आख़िरी फ़ेल है, कि जो कुछ लिया, उसका भी मुआबज़ा दाखिल कर दिया।
हदीस नम्बर6, हज़रत अली बिन माबद रहमतुल्लाह अलईही, का किराये के मकान से तहरीर को खुश्क करना
[3D]अली बिन माबद रहमतुल्लाह अलईही, एक मुहद्दिस हैं,, फ़रमाते हैं,, मैं एक किराये के मकान में रहता था, एक मर्तबा मैंने कुछ लिखा और उसको खुश्क करने के लिए मिट्टी की ज़रूरत हुई कच्ची दीवार थी। मुझे ख़्याल आया कि इस पर से ज़रा सी खुरच के तहरीर पर डाल लूं, फिर ख़्याल आया कि मकान किराये का है, (जो रहने के वास्ते किराये पर लिया गया, न मिट्टी लेने के वास्ते) मगर साथ ही यह ख़्याल आया कि इतनी ज़रा सी मिट्टी में क्या मज़ायक़ा है,। मामूली चीज़ है,। मैंने मिट्टी ले ली और रात को ख़्वाब में देखा कि एक साहब खड़े हैं,, जो यह फ़रमा रहे हैं, कि कल क़यामत को मालूम होगा, यह कहना कि मामूली मिट्टी क्या चीज़ है,।
फायदा, 'कल मालूम होगा' का, ब-ज़ाहिर मतलब यह है, कि तक़्वा के दरजात बहुत ज़्यादा हैं,, कमाल दर्जा यह यक़ीनन था, कि इससे भी एहतराज़ (बचना,) किया जाता अगर्चे उर्फ़न मामूली चीज़ शुमार होने से जवाज़ की हद में था।
हदीस नम्बर7, हज़रत अली रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का एक क़ब्र पर गुज़र
[3D]कुमैल रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, एक शख़्स हैं,, कहते हैं, कि मैं हज़रत अली कर्रमल्लाहु वजहहू के साथ एक मर्तबा जा रहा था। वह जंगल में पहुंचे, फिर एक मक़बरे की तरफ मुतवज्जह हुए और फ़रमाया, ऐ मक़बरे वालो ! ऐ बोसीदगी वालों , ऐ वहशत और तन्हाई वालों, क्या ख़बर है,, क्या हाल है, ? फिर इर्शाद फ़रमाया हमारी ख़बर तो यह है, कि तुम्हारे बाद अम्वाल तक़्सीम हो गये। औलादें यतीम हो गयीं, बीवियों ने दूसरे ख़ाविन्द कर लिए। यह तो हमारी ख़बर है,, कुछ अपनी तो कहो। इसके बाद मेरी तरफ मुतवज्जह हो कर फ़रमाया, कुमैल , अगर इन लोगों को बोलने की इजाज़त होती और यह बोल सकते तो यह लोग जवाब में यह कहते हैं, कि बेहतरीन तोशा तक़्वा है,। यह फ़रमाया और फिर रोने लगे और फ़रमाया, ऐ कुमैल ! क़ब्र अमल का संदूक़ है, और मौत के वक़्त बात मालूम हो जाती है
[3D]फायदा, यानी आदमी जो कुछ अच्छा या बुरा काम करता है,, वह उसकी क़ब्र में महफ़ूज़ रहता है,, जैसा कि सन्दूक़ में, मुताअद्दद अहादीस में यह मज़मून वारिद हुआ है, कि नेक आमाल अच्छे आदमी की सूरत में होते हैं, जो मय्यत के जी बहलाने और उन्स पैदा करने के लिए रहता है, और उस की दिलदारी करता है, और बुरे आमाल बुरी सूरत में बदबूदार बन कर आते हैं,, जो और भी अज़ीयत का सबब होता है,।
[3D]एक हदीस में वारिद है, कि आदमी के साथ तीन चीजें क़ब्र तक जाती हैं,, उसका माल जैसा कि अरब में दस्तूर था, उसके रिश्तेदार और उसके आमाल। दो चीजें माल और रिश्तेदार दफ़्न करके वापस आ जाते हैं,, अमल उसके साथ रह जाता है,।
हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक मर्तबा सहाबा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, से इर्शाद फ़रमाया कि तुम्हें मालूम है, कि तुम्हारी मिसाल और तुम्हारे अहल व अयाल और माल व आमाल की मिसाल क्या है,। सहाबा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, के दर्याफ़्त फ़रमाने पर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने इर्शाद फ़रमाया कि उसकी मिसाल ऐसी है,, जैसे एक शख़्स के तीन भाई हों और वह मरने लगे। उस वक़्त एक भाई को वह बुलाये और पूछे कि भाई तुझे मेरा हाल मालूम है, कि मुझ पर क्या गुज़र रही है,, इस वक़्त तू मेरी क्या मदद करेगा। वह जवाब देता है, कि तेरी तीमारदारी करूंगा, इलाज करूंगा, हर किस्म की ख़िदमत करूंगा और जब तू मर जाएगा, तो नहलाऊंगा, कफ़न पहनाऊंगा और कांधे पर उठाकर ले जाऊंगा। दफ़्न के बाद तेरा ज़िक्रे ख़ैर करूंगा।
[3D]हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने फ़रमाया, यह भाई तो अहल व अयाल है,। फिर वह दूसरे भाई से यही सवाल करता है, वह कहता है, कि मेरा तेरा वास्ता ज़िन्दगी का है,। जब तू मर जाएगा तो मैं दूसरी जगह चला जाऊंगा। यह भाई माल है,। फिर वह तीसरे भाई को बुलाकर पूछता है, वह कहता कि मैं क़ब्र में तेरा साथी हूं, वहशत की जगह तेरा दिल बहलाने वाला हूं। जब तेरा हिसाब-किताब होने लगे, तो नेकियों के पलड़े में बैठ कर उसको झुकाऊंगा, यह भाई अमल है,। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने फ़रमाया, अब बताओ कौन सा भाई कारआमद हुआ। सहाबा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह ! यही भाई कार आमद है,, पहले दो तो बे-फ़ायदा ही रहे,
इस जिल्द की, बाकी हदीसे जल्द ही, वेबसाइट पर अपलोड, कर दी जायेंगी, इन्शा अल्लाह, दुआ का तलब गार, आपका खादिम, मुहम्मद इलयास, मेरे और, मेरे परिवार, के हक़ में दुआ करे