Fazail e Amaal (Hikayate Sahaba) B2/5

दूसरा बाब हदीस नम्बर 5,हज़रत अबूबक्र, रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, पर अल्लाह का डर पेज नम्बर 44से45,तक फ़ज़ाइले आमाल हिन्दी

हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़, रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, जो ब इज्मा अहले सुन्नत  तमाम सुन्नत वाले जिस पर एक राय हैं अम्बिया के अलावा तमाम दुनिया के, आदमियों से अफ़ज़ल हैं, और उनका जन्नती होना यक़ीनी है, कि ख़ुद हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने उनको जन्नती होने की बशारत दी, बल्कि जन्नतियों की एक जमाअत का सरदार बताया, और जन्नत के सब दरवाज़ों से उनकी पुकार, और बुलावे की ख़ुशख़बरी दी, और यह भी फ़र्माया कि मेरी उम्मत में सबसे पहले अबूबक्र रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, जन्नत में दाख़िल होंगे, 

[3D]इस सब के बावजूद फ़र्माया करते कि काश ! मैं कोई दरख़्त होता जो काट दिया जाता। कभी फ़र्माते काश ! मैं कोई घास होता कि जानवर उसको खा लेते। कभी फ़र्माते काश ! मैं किसी मोमिन के बदन का बाल होता। एक मर्तबा एक बाग़ में तशरीफ़ ले गए और एक जानवर को बैठा हुआ देख कर ठंडी सांस भरी, और फ़र्माया कि तू किस क़दर लुत्फ़ में है कि खाता है, पीता है, दरख़्तों के साए में फिरता है, और आख़िरत में तुझ पर कोई हिसाब किताब नहीं, काश अबूबक्र भी तुझ जैसा होता 

रबीआ अस्लमी रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, कहते हैं, कि एक मर्तबा किसी बात पर मुझमें और हज़रत अबूबक्र रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, में कुछ बात बढ़ गई, और उन्होंने मुझे कोई सख़्त लफ़्ज़ कह दिया, जो मुझे नागवार गुज़रा। फ़ौरन उनको ख़याल हुआ, मुझसे फ़र्माया कि तू भी मुझे कह दे ताकि बदला हो जाये। मैंने कहने से इन्कार कर दिया, तो उन्होंने फ़र्माया कि या तो कह लो वरना, मैं हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, से जाकर अर्ज़ करूंगा। मैंने इस पर भी जवाबी लफ़्ज़ कहने से इन्कार किया। 

वह तो उठ कर चले गये। बनू असलम के कुछ लोग आये कहने लगे, कि यह भी अच्छी बात है, कि ख़ुद ही ज़्यादती की,और ख़ुद ही उल्टी हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, से शिकायत करें। मैंने कहा तुम जानते भी हो यह कौन हैं। यह अबूबक्र सिद्दीक़ हैं, अगर यह ख़फ़ा हो गए, तो अल्लाह का लाडला रसूल सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, मुझसे ख़फ़ा हो जाएगा, और उसकी ख़फ़गी नाराज़गी से अल्लाह, नाराज़ हो जायेंगे, तो रबीआ की हलाकत में क्या तरद्दुद है। इसके बाद मैं हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और क़िस्सा अर्ज़ किया। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने फ़र्माया कि ठीक है, तुझे जवाब में और बदले में कहना नहीं चाहिए, अलबत्ता इसके बदले में यूँ कह कि ऐ अबूबक्र ! अल्लाह तुम्हें माफ़ फ़र्मा दें।

[3D]फायदा – यह है अल्लाह का ख़ौफ़, कि एक मामूली से कलमे में, हज़रत अबू बक्र रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, को बदले का इस क़दर, फ़िक्र और एहतमाम हुआ, कि अव्वल ख़ुद दर्ख़्वास्त की, और फिर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के वास्ते से उसका इरादा फ़र्माया, कि रबीआ बदला ले लें। आज हम सैकड़ों बातें एक दूसरे को कह देते हैं, इस का ख़याल भी नहीं होता, कि उसका आख़िरत में बदला भी, लिया जायेगा या हिसाब किताब भी होगा।

इस जिल्द की, बाकी हदीसे जल्द ही, वेबसाइट पर अपलोड, कर दी जायेंगी,  इन्शा अल्लाह,दुवा का तलब गार, आपका खादिम, मुहम्मद इलयास,मेरे और, मेरे परिवार,  के हक़ में दुआ करे

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