दूसरा बाब हदीस नम्बर 3,अंधेरे में सूरज ग्रहण में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, का अमल पेज नम्बर 42से43 ,तक फ़ज़ाइले आमाल हिन्दी
हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के ज़माने में सूरज ग्रहण हो गया। सहाबा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, को फ़िक्र हुई कि इस मौक़े पर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, क्या अमल फ़र्मायेंगे, क्या करेंगे, इसकी तहक़ीक़ की जाए। जो हज़रत अपने-अपने काम में मश्ग़ूल थे, छोड़ कर दौड़े हुए आये, नव उम्र लड़के जो तीर अन्दाज़ी की मश्क़ कर रहे थे, उनको छोड़कर लपके हुए आये, ताकि यह देखें कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, इस वक़्त क्या करेंगे।
नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने दो रकअत कुसूफ़ सूरज ग्रहण की नमाज़ पढ़ी, जो इतनी लम्बी थी कि लोग ग़श खाकर गिरने लगे। नमाज़ में नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, रोते थे, और फ़र्माते थे, ऐ रब ! क्या आपने मुझ से इसका वायदा नहीं फरमा रखा कि, आप इन लोगों को मेरे मौजूद होते हुए अज़ाब न फ़र्मायेंगे, और ऐसी हालत में भी अज़ाब न फ़र्मायेंगे, कि वह लोग इस्तगफार करते रहें। सूरः अन्फ़ाल में अल्लाह जल्ले शानुहू ने इसका वायदा फरमा रखा है-
अरबी आयत:, وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُعَذِّبَهُمْ وَأَنتَ فِيهِمْ ۚ وَمَا كَانَ اللَّهُ مُعَذِّبَهُمْ وَهُمْ يَسْتَغْفِرُونَ, (वा मा काानल्लाहु लिगु अज्ज़िबहुम व अन्त फ़ीहिम वमा कानल्लाहु मुअज्ज़ि बहुम व hum यस्तग़फ़िरून)
[3D]फिर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, ने लोगों को नसीहत फ़र्मायी, कि जब कभी ऐसा मौक़ा हो और आफ़ताब या चांद ग्रहण हो जाये, तो घबराकर नमाज़ की तरफ़ मुतवज्जह हो जाया करो। मैं जो आख़िरत के हालात देखता हूं अगर तुम को मालूम हो जायें, तो हंसना कम कर दो, और रोने की कसरत कर दो। जब कभी ऐसी हालत पेश आये, नमाज़ पढ़ो, दुआ मांगो सदक़ा करो
इस जिल्द की, बाकी हदीसे जल्द ही, वेबसाइट पर अपलोड, कर दी जायेंगी, इन्शा अल्लाह,दुवा का तलब गार, आपका खादिम, मुहम्मद इलयास,मेरे और, मेरे परिवार, के हक़ में दुआ करे