दूसरा बाब हदीस नम्बर 2,अंधेरे में हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, का फ़ेल,पेज नम्बर 42,फ़ज़ाइले आमाल हिन्दी
नजर बिन अब्दुल्लाह रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, कहते हैं कि हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की ज़िन्दगी में एक मर्तबा दिन में अंधेरा छा गया। मैं हज़रत अनस रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और अर्ज़ किया, कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के सामने में भी इस क़िस्म की चीज़ें पेश आती थी। उन्होंने फ़र्माया ख़ुदा की पनाह, हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के ज़माने में तो ज़रा सी हवा तेज़ हो जाती थी, तो हम लोग क़यामत के आ जाने के ख़ौफ़ से, मस्जिदों में दौड़ जाते थे। एक दूसरे सहाबी अबुद्दर्दा रजि अल्लाहु ताआला अन्हु, फ़र्माते हैं, कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, का मामूल था, कि जब आंधी चलती तो, हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, घबराये हुए मस्जिद में तशरीफ़ ले जाते
फायदा – आज किसी बड़े से बड़े हादसा-मुसीबत-बला में भी मस्जिद किसी को याद आती है, अवाम को छोड़ कर ख़्वास में भी इसका एहतमाम, कुछ पाया जाता है? आप ख़ुद ही इसका जवाब अपने दिल में सोचें।
इस जिल्द की, बाकी हदीसे जल्द ही, वेबसाइट पर अपलोड, कर दी जायेंगी, इन्शा अल्लाह,दुवा का तलब गार, आपका खादिम, मुहम्मद इलयास,मेरे और, मेरे परिवार, के हक़ में दुआ करे