दूसरा बाब हदीस नम्बर1,आंधी के वक़्त हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, का तरीक़ा,पेज 40से42,तक फ़ज़ाइले आमाल हिन्दी
दीन के साथ उस जांफ़शानी के बावजूद, जिसके क़िस्से अभी गुज़रे, और दीन के लिए अपनी जान व माल, आबरू सब कुछ फ़ना कर देने के बाद, जिसका नमूना अभी आप देख चुके हैं, अल्लाह जल्ले शानुहू का ख़ौफ़ और डर, जिस क़दर इन हज़रात में पाया जाता था, अल्लाह करे कि उसका कुछ शम्मा हिस्सा हम सियाहकारों को भी नसीब हो जाये। मिसाल के तौर पर इसके भी चन्द क़िस्से लिखे जाते हैं-,हज़रत आइशा रजि अल्लाहु ताआला अन्हा, फ़र्माती हैं कि जब अब्र, आंधी वग़ैरह होती थी,हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम, के चेहरा-ए-अन्वर पर उस का असर ज़ाहिर होता था, और चेहरे का रंग फ़क़ फीका हो जाता था, और ख़ौफ़ की वजह से कभी अन्दर तशरीफ़ ले जाते थे, और कभी बाहर तशरीफ़ लाते थे, और यह दुआ पढ़ते रहते-
अरबी दुआ:,اَللّٰهُمَّ اِنِّىْ اَسْئَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا فِيْهَا وَخَيْرَ مَا اُرْسِلَتْ بِهِ وَاَعُوْذُبِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا فِيْهَا وَشَرِّ مَا اُرْسِلَتْ بِهِ,(अल्लाहुम्म: इन्नी अस्अलुक ख़ैरहा व ख़ैर मा फ़ीहा व ख़ैर मा उरसिलत बिहि व अऊज़ुबि क मिन शर्रिहा फ़ीहा व शर्रिमा उरसिलत बिही),तर्जुमा, या अल्लाह, इस हवा की भलाई चाहता हूं और जो इस हवा में हो, बारिश वग़ैरह उसकी भलाई चाहता हूं और जिस ग़रज़ से यह भेजी गई, उसकी भलाई चाहता हूं, या अल्लाह ! मैं इस हवा की बुराई से पनाह मांगता हूं, और जो चीज़ इसमें है, और जिस ग़रज़ से यह भेजी गई, उसकी बुराई से पनाह मांगता हूं।'
और जब बारिश शुरू हो जाती तो चेहरे पर इम्बिसात खुशी होता। मैंने अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह ! सब लोग जब अब्र देखते हैं तो ख़ुश होते हैं, कि बारिश के आसार मालूम हुए, मगर आप सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम,पर एक गरानी महसूस होती है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलईही व सल्लम,ने इर्शाद फ़र्माया, आइशा मुझे इसका क्या इत्मीनान है, कि इसमें अज़ाब न हो। क़ौमे-आद को हवा के साथ ही अज़ाब दिया गया, और वह अब्र को देख कर ख़ुश हुए थे, कि इस अब्र में हमारे लिए पानी बरसाया जायेगा, हालाँकि इसमें अज़ाब बयानुल क़ुरआन था। अल्लाह जल्ले शानुहू का इर्शाद है-
अरबी आयत:,فَلَمَّا رَاَوْهُ عَارِضًا مُّسْتَقْبِلَ اَوْدِيَتِهِمْ,(फ़लम्मा रऔहु आरिज़म् मस्त क़िबल: औदियतिहिम),तर्जुमा: उन लोगों ने (यानी क़ौमे-आद ने) जब उस बादल को अपनी वादियों के मुक़ाबिले आते देखा तो कहने लगे, यह बादल तो हम पर बारिश बरसाने वाला है, (इर्शादे ख़ुदावन्दी हुआ कि), नहीं, बरसाने वाला नहीं है। बल्कि यह वही (अज़ाब है), जिसकी तुम जल्दी मचाते थे, (और नबी से कहते थे, कि अगर तू सच्चा है तो हम पर अज़ाब ला), एक आंधी है, जिसमें दर्दनाक अज़ाब है, जो हर चीज़ को अपने रब के हुक्म से हलाक कर देगी। चुनांचे वह लोग आंधी की वजह से ऐसे तबाह हो गए कि बजुज़ उनके मकानात के कुछ न दिखलाई देता था और हम मुजरिमों को इसी तरह सज़ा दिया करते हैं।
फायदा – यह अल्लाह के ख़ौफ़ का हाल उसी पाक ज़ात का है, जिसका सय्यिदुल अव्वलीन वल आख़िरीन अगलों-पिछलों के सरदार होना, ख़ुद उसी के इर्शाद से सबको मालूम है, कि ख़ुदा कलामें पाक में यह इर्शाद है कि, अल्लाह तआला ऐसा न करेंगे कि उनमें आपके होते हुए उनको अज़ाब दें। इस वायदा-ए-ख़ुदावन्दी के बावजूद, फिर हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, के ख़ौफ़े इलाही का यह हाल था, कि अब्र और आंधी को देखकर पहली क़ौमों के अज़ाब याद आ जाते थे, उसी के साथ एक निगाह अपने हाल पर भी करना है, कि हम लोग हर वक़्त गुनाहों में मुब्तला रहते हैं, और ज़लज़लों और दूसरी क़िस्म के अज़ाबों को देखकर बजाए इस से मुतास्सिर असर लेने को होने के, तौबा, इस्तगफार, नमाज़ वग़ैरह में मश्ग़ूल होने के, दूसरी क़िस्म-क़िस्म की लग्व तहक़ीक़ात में पड़ जाते हैं।
इस जिल्द की, बाकी हदीसे जल्द ही, वेबसाइट पर अपलोड, कर दी जायेंगी,इन्शा अल्लाह,दुवा का तलब गार, आपका खादिम, मुहम्मद इलयास,मेरे और,मेरे परिवार,के हक़ में दुआ करे